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चाची की सुहागरात का नजारा- Chachi ki suhagraat ka nazara

प्रेषक : विजय …

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम विजय है और आज में आप सभी को AntarVasnaSex.Net पर अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ.. वैसे मैंने AntarVasnaSex.Net पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ी बहुत है.. लेकिन अपनी कहानी भेज पहली बार रहा हूँ मुझसे कोई गलती हो तो प्लीज मुझे माफ़ करे.. वैसे में उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को बहुत पसंद आएगी। अब में सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ। दोस्तों यह बात उस समय की है जब मेरे चाचा की शादी की बात चल रही थी। तो हम लोग रविवार को चाचा के लिए एक लड़की को देखने उनके घर गये हुए थे.. हम सब लोग बैठे थे और लड़की का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और फिर लड़की चाय लेकर आई।

मेरे चाचा ने जैसे ही लड़की को देखा तो उनके मुहं से धीरे से निकल गया कि वाह क्या माल है? में उनके पास में बैठा था और मैंने वो सुन लिया.. लेकिन इसमे चाचा की कोई ग़लती नहीं थी क्योंकि वो लड़की वाकई में बहुत सुंदर थी। उसके बड़े बड़े बूब्स, मोटी सी गांड, पतली कमर जो उसे देखे बस यही बात सोचे कि काश यह मुझे एक बार चोदने के लिए मिल जाए। फिर मेरा भी मन किया कि अभी अपनी होने वाली चाची के मुहं में लंड डालकर उसे तब तक चुसाऊँ जब तक में झड़ ना जाऊँ.. मेरा और मेरे चाचा का एक जैसा हाल था। फिर हम सबने शादी के लिया हाँ कर दी और उनकी शादी अगले महीने तय हो गयी। फिर बहुत जल्द वो वक्त भी आ गया और मेरे चाचा, चाची की शादी हो गयी और हम सब लोग चाची के पास बैठे बैठे उनसे हंसी मज़ाक कर रहे थे। में चाची से थोड़ा सटकर बैठा था और मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और उस वक्त चाची बड़ी हॉट, सेक्सी लग रही थी और उस समय रात के 10 बज रहे थे। तभी कुछ लड़कियां हंसती, मुस्कुराती वहाँ पर आई और चाची को हमारे बीच से उठाकर ले गयी.. मुझे पता था कि वो चाची को चाचा के कमरे में ले जा रही थी।

तो में भी अपनी तैयारी में जुट गया और मैंने बहुत पहले से ही चाची की चुदाई देखने का प्रोग्राम बना रखा था क्योंकि मेरा कमरा चाचा के कमरे के बिल्कुल पास में ही था और उसके बीच में एक दरवाजा था.. जिसमे थोड़ी थोड़ी दूरी पर छोटे छोटे छेद थे और मैंने अपना बिस्तर वहीं छेद के पास लगा रखा था क्योंकि मेरा पूरा प्रोग्राम फिक्स था। तभी चाची कमरे आई और बिस्तर पर बैठ गयी और थोड़ी देर बाद चाचा भी वहाँ पर आए और चाची के पास में बैठ गये। तो चाची बोली कि लाईट बुझा क्यों नहीं देते? तभी चाचा ने कहा कि में आज तुम्हारी पूरी सुन्दरता देखना चाहता हूँ.. क्या मुझे आज वो सब देखने दोगी? तो चाची ने थोड़ा शरमा कर कहा कि अब तो यह सब आपका ही है आप जितना चाहो देख लो। फिर चाचा ने चाची को अपनी बाहों में भर लिया और चाची को चूमने लगे और चाची भी धीरे धीरे गरम हो रही थी। तभी चाचा ने धीरे से चाची की साड़ी को उतार दिया और चाची अब सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थी और एकदम सेक्सी कयामत की तरह सुंदर दिख रही थी। फिर चाचा ने चाची का पेटीकोट भी उतार दिया और अपनी बाहों में भरकर चाची को ज़मीन पर खड़ा करके उन्हे चूमने लगे। फिर काली ब्रा और काली पेंटी में चाची का गोरा गोरा बदन बहुत ही सुंदर लग रहा था और फिर चाची ज़ोर से चिल्लाई क्योंकि चाचा ने चाची के बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही ज़ोर से दबाकर उन पर काट लिया था। दोस्तों यह सब देखकर मेरा तो लंड एकदम खड़ा होने लगा था। कभी चाचा, चाची के चूतड़ दबाते तो कभी उनकी पतली कमर तो कभी उनके मुलायम गोरे बड़े बड़े बूब्स और चाचा किसी पागल की तरह उनके बूब्स चूस रहे थे। तभी चाची ने चाचा से कहा कि ब्रा के ऊपर से ही चूसते रहोगे या ब्रा को भी उतारोगे यह अब पूरी गीली हो चुकी है। तो चाचा ने चाची की ब्रा को जैसे ही खोला दोनों बूब्स एकदम ऐसे बाहर आए जैसे ज्वालामुखी फटता है.. गोरे गोरे मोटे बूब्स और उनके ऊपर गुलाबी रंग के निप्पल लगे हुए थे। तो चाचा ने चाची की पेंटी को भी उतार दिया और अब में चाची के बड़े और गोरे चूतड़ देख रहा था और मेरा हाथ अपने आप मेरे लंड के ऊपर चला गया और मैंने मुठ मारनी शुरू कर दी। तभी चाचा ने अपना अंडरवियर उतारा और चाची को अपने लंड के ऊपर झुका लिया और चाची, चाचा के लंड के सामने बैठ गयी और में बैठी हुई चाची की गांड देख रहा था वो बड़ी मस्त थी।

फिर चाची, चाचा का लंड हाथ में पकड़े हुई थी और कहने लगी कि यह तो बहुत बड़ा है और यह अंदर कैसे जाएगा? और फिर चाचा का लंड चूसने लगी और चाचा भी चाची की गांड को झुककर दबा रहा था। तो चाचा ने चाची को बिस्तर पर लेटा दिया और तभी मुझे चाची की मस्त चूत के दर्शन हुए गोरी गोरी उभरी हुई चूत और चाचा, चाची के ऊपर 69 की पोज़िशन में लेट गये और चाची की चूत को चाटने लगे और चाची, चाचा के लंड को बड़ी मस्त होकर चूसने लगी.. वो कभी उनके आँड को तो कभी लंड के सुपाड़े को कुल्फी की तरह चूस रही थी और उन दोनों को उस हालत में देखकर मेरी भी मुठ मारने की स्पीड बढ़ गयी। तभी थोड़ी देर बाद चाचा ने चाची को नीचे किया और चाची की चूत के मुहं पर लंड के सुपाड़े को रखा तो चाची सिहर उठी और कहने लगी आपका लंड बहुत बड़ा है ज़रा धीरे धीरे करना। तो चाचा बोले कि तुम फ़िक्र मत करो मेरी जान.. आज में तुम्हे जन्नत की सैर कराऊंगा।

फिर चाचा ने एक ज़ोरदार धक्का मारा तो लंड फच की आवाज़ करता हुआ चूत में घुसता चला गया और चाची ज़ोर से चिल्लाई उईई माँ मर गई में आज कहा था ना धीरे करना और चाची की चूत में से खून निकलकर चाचा के लंड पर लग गया। तभी चाचा, चाची को चूमने लगे और उनकी बूब्स को दबाने लगे चाची भी मस्त होने लगी और तभी चाचा ने दूसरा धक्का मारा और लंड अब पूरा का पूरा चूत में चला गया.. चाची फिर चिल्लाई उईईइ अह्ह्ह मर गयी। फिर क्या था चाचा ने धक्के पे धक्के मारने शुरू किये और अब चाची को दर्द कम मज़ा ज़्यादा आने लगा और चाची नीचे से उचक उचककर चाचा का साथ देने लगी। चाचा का लंड पूरी तरह गीला हो चुका था और मुझे लग रहा था कि चाची झड़ चुकी थी.. लेकिन चाचा तो धक्के पे धक्का लगा रहे थे और चाची की आवाज़ पूरे कमरे मे गूँज रही थी आई ईईईईईई अह्ह्ह उईईईई।

फिर चाचा ने अपना लंड चाची की चूत से निकालकर चाची के मुहं तक लाकर उनके मस्त गुलाबी होंठो पर रख दिया और चाची किसी भूखी शेरनी की तरह चाचा के लंड को चूसने लगी और चाचा, चाची की चूत में अपनी उंगली से चाची को चोदने लगे और एक हाथ से चाची के मोटे चूतड़ और गोल गोल मोटे बूब्स को सहला रहे थे। फिर चाचा थोड़ी देर बाद बिस्तर पर सीधे लेट गये और उनका लंड एकदम तना हुआ था.. तभी वो चाची से बोले कि आजा मेरे ऊपर आकर मुझे चोद और चाची बोली कि अब तक आपने मुझे चोदा.. अब क्या अब में भी आपको चोदूँ? तो चाचा बोले कि हाँ और तभी चाची, चाचा के ऊपर आ गई और अपनी चूत के मुहं पर लंड को रखा और उस पर बैठ गयी और पच की आवाज़ के साथ पूरा लंड चूत में चला गया और चाची, चाचा के कंधो पर अपने दोनों हाथ टिकाकर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगी और पूरे कमरे में चाची की आवाज़ गूँज रही थी और चाचा भी चिल्ला रहे थे और ज़ोर ज़ोर से मारो मेरी रानी.. हाँ और ज़ोर से। तो चाची की मोटी गांड किसी पानी से भरे गुब्बारे की तरह ऊपर नीचे हो रही थी और चाचा का सीधा वाला हाथ चाची की गांड पर और दूसरे वाले हाथ की दो उंगली चाची की गांड के छेद में घुसी हुई थी और चाची उईई माँ मर गई माँ अहह उह्ह की आवाज़ निकाल रही थी। तभी चाचा ने चाची को ऊपर से हटने को कहा और चाची को घोड़ी बनने को कहा.. चाची भी मस्ती में थी और वो बन गयी और मुझे चाची की गोरी बड़ी गांड का छेद साफ साफ नज़र आ रहा था.. वो चाचा की दो उंगलियों की वजह से बहुत फैला हुआ था। फिर चाचा ने पहले तो चाची की चूत में लंड डाला और चाची मस्त हो चुकी थी।

तभी चाचा ने लंड चूत में से बाहर निकाला और चाची की गांड के छेद पर रख दिया.. चाची डर गयी और बोली कि नहीं गांड में नहीं मुझे बहुत दर्द होगा। तो चाचा ने कहा कि मेरी रानी में हूँ ना तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो दर्द नहीं होगा और ज़ोर से धक्का मार दिया.. आधे से ज़्यादा लंड चाची की चूत में चला गया। तो चाची बहुत ज़ोर से चिल्लाई उउईइ माँ मर गई में और चाची की गांड फट गयी थी और उसमे से थोड़ा सा खून भी बाहर आ गया था.. लेकिन चाचा कहाँ रुकने वाला था? चाचा तो धक्के पे धक्का लगा रहा था। तो चाची भी कुछ देर बाद पूरे जोश में आ गयी थी और कहने लगी कि हाँ ज़ोर से और ज़ोर से। तो चाचा भी चाची की गांड पर चढ़ पड़ा था और वो गांड को चोद रहा था और जैसे ही लंड को बाहर निकाला तो चाची की गांड का छेद बहुत ढीला पड़ चुका था। तो इधर में भी मुठ मार रहा था और मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था और इस बीच चाची दो बार झड़ चुकी थी.. लेकिन चाचा अभी भी नहीं झड़ा था। फिर चाचा ने चाची को नीचे लेटाया और धक्के लगाने शुरू किए और चाची भी अपनी गांड उछालकर नीचे से ही चाचा के धक्को का जवाब दे रही थी। चाचा की स्पीड बडती जा रही थी और मेरा हाथ भी मेरे लंड पर बड़ी तेज़ी से चल रहा था और चाचा भी धक्के पे धक्का लगा रहा था। तभी चाचा, चाची की चूत में और में अपने बेड पर झड़ गया और चाची भी चाचा से लिपटकर तीसरी बार झड़ चुकी थी ।।

धन्यवाद …

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