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बुआ की पड़ोसन ने आँख मारी: Bua ki padosan ne aankh mari

प्रेषक : सागर शर्मा ..

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम सागर शर्मा है और मेरा आप सभी से निवेदन है कि अपने लंड और चूत को दबा दबाकर मुठ मारना शुरू कर दे.. क्योंकि शायद आप झड़े बिना रह नहीं पाएगे। दोस्तों में 18 साल का हूँ और में अच्छे शरीर, अच्छी हाईट और साफ कलर का हूँ और मेरा लंड 6.5 इंच बड़ा है और 2 मोटा। में आप सभी से आज एक कहानी शेयर करने जा रहा हूँ और मुझे मेरी पिछली कहानी के लिए आप सभी के बहुत मेल मिले उसके लिए आप सभी को धन्यवाद.. वैसे में AntarvasnaSEX.Net पर पिछले कई सालों से कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और वो मुझे बहुत पसंद भी है। दोस्तों यह बात मेरी गर्मियों की छुट्टी की है में उस समय अपनी बुआ के घर गया हुआ था और उन दिनों मेरा कुछ काम करने का तो मन नहीं था तो में मूड फ्रेश करने अपनी बुआ के घर पर चला गया। वो दिल्ली में रहती है और में वहाँ पर बहुत मज़े करता था क्योंकि उनके बच्चे बहुत छोटे है तो वो मस्ती किए बिना मानते नहीं है। वहाँ पर उनके घर के पास वाले घर में एक परिवार रहता है उसमे एक बहुत सुंदर लड़की भी रहती है.. लेकिन वो अनपड़ है और जब भी अक्सर में शाम को छत पर जाता था तो वो भी अक्सर छत पर आती थी। कभी किसी बहाने तो कभी किसी बहाने से और में इस बात पर गौर करता था।

उसका नाम रेणुका है और वो दिखने में सांवली है.. लेकिन कामुक भी लगती है। शाम को बहुत गर्मी होती थी तो वो नहाकर जब बाहर आती थी तो कसम से क्या सेक्सी लगती थी? और उसके बदन से साबुन की हल्की हल्की खुश्बू आती थी और में मदहोश सा होने लगता था। तो एक दिन जब शाम को छत पर वो जब आई तो मैंने पूछा कि कैसी हो? तो वो बोली कि में ठीक हूँ.. फिर मैंने कहा कि आप बहुत सुंदर लग रही हो। तो वो बोली कि अच्छा शुक्रिया.. मैंने कहा कि क्या आप मुझसे दोस्ती करोगी? तो वो बोली कि कैसी दोस्ती करोगे? क्या तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे? तो मैंने कहा कि हाँ में बनाऊंगा तो क्या तुम खुश हो जाओगी? फिर वो बोली कि में तो बहुत खुश हो जाऊंगी.. लेकिन में अनपड़ हूँ और तुम मुझे कैसे पसंद करोगे? तो मैंने कहा कि कोई बात नहीं में तुम्हे बहुत सारा प्यार दूँगा.. क्या तुम मेरी बनोगी? तो वो बोली कि मैंने तो जब से तुन्हें देखा है तब से तुम्हे अपना बनाना चाहती हूँ।

तो मैंने कहा कि तो फिर क्या हुआ बन जाओ मेरी.. लेकिन हम करेंगे क्या? वो बोली कि जो सब करते है वही या शायद उससे भी ज़्यादा। तो मैंने कहा कि क्या मतलब? वो बोली कि कल शाम को मिलना छत पर में तब तुम्हे सब बता दूंगी और वो मेरी तरफ आँख मारकर चली गयी। तो में अब मन ही मन बहुत खुश होता जा रहा था और मुझे उससे मिलने जाने की मन में बड़ी बेसब्री थी और में जब भी उसे देखता तो खुश हो जाता और उसे आँख मरता या फिर फ़्लाइंग किस दे देता। फिर आख़िर वो पल आ ही गया था और धीरे धीरे शाम हो चुकी थी और शाम के 5 भी बज गये थे और में छत पर बैठकर उसका इंतज़ार कर रहा था। तभी वो छत पर आई और में उस दीवार के पास गया.. सामने एक बड़ा घर था तो में आसानी से किसी को नज़र नहीं आ रहा था। फिर उसने मुझसे कहा कि कल सुबह उसके घर वाले बाहर चले जाएँगे और वो घर पर बिल्कुल अकेली रहेगी.. तो तुम किसी तरह छत से नीचे मेरे घर में आ जाना और परसों तक मेरे साथ ही रहना। तो मैंने कहा कि लेकिन मुझे मेरी बुआ आने नहीं देंगी। तो उसने कहा कि में आंटी को कह दूँगी कि तुम्हे छोड़ दे.. फिर मैंने कहा कि ठीक है और में उसके करीब गया उसके गाल पर अपना एक हाथ रखा और धीरे धीरे उसके होंठो के करीब गया तो वो अपनी आखें बंद करके थोड़ा आगे हुई और मैंने उसके होंठो से अपने होंठ लगाए और लिप किस करने लगा और फिर वो भी मेरा साथ दे रही थी वो क्या टाईम था पता ही नहीं चल रहा था? कभी मेरी जीभ उसके मुहं में जाती तो कभी उसकी मेरे मुहं में.. अब हमें बहुत मज़ा आ रहा था और बहुत देर तक लगे रहे। तभी थोड़ी देर बार उसकी माँ ने उसे बुला लिया तो वो बोली कि आज रात को मेरी माँ तुम्हारी बुआ से बात करने आएँगी। फिर वो मुझे अकेला छत पर छोड़कर जल्दी से वहाँ से नीचे चली गई.. लेकिन में अब भी उसके होंठो की गरमी महसूस कर रहा था और उसी के बारे में सोच रहा था। उसको सोच सोचकर मेरा लंड धीरे धीरे गरम होकर अपना आकार लेने लगा और कुछ देर बाद के ज़ोर के हवा के झोके ने मुझे नींद से उठा दिया और में उसके किस को सोचकर नीचे कमरे में आ गया।

फिर उसी दिन कुछ घंटो के बाद रात को उसकी मम्मी मेरी बुआ से बात करने आई और वो उन से बोली कि उन्हे कल दो दिन के लिए अचानक किसी काम से बाहर जाना है और क्या आप सागर को दो दिन के लिए हमारे घर पर रुकने की इजाजत दोगी.. क्योंकि हमारी रेणु की तबियत भी खराब है और उसे रात को अकेले घर पर बहुत डर लगता है। तो बुआ ने कहा कि ठीक है और में उन दोनों का खाना भी बनाकर भेज दूँगी आप उससे कहना कि वो खाना ना बनाए.. तो आंटी यह बात सुनकर चली गई। तो में अब अगले दिन के लिए बहुत बेसब्र हो रहा था और मुझे उस रात ठीक से नींद भी नहीं आई। में हर पल उसके ही बारे में सोचता रहा। फिर में सुबह जल्दी ही उठ गया और नहा धोकर जल्दी से उनके घर पर चला गया। तो आंटी मुझे वहीं पर मिली और वो बोली कि आ बैठ क्या कुछ लेगा? तो मैंने ना कहा और वहाँ सोफे पर बैठकर उनके जाने की बड़ी बेसब्री से राह देखता रहा और फिर जब वो चली गई तो मैंने रेणुका को अपने हाथों से खाना खिला दिया और मैंने भी खाया। दोस्तों ये कहानी आप AntarvasnaSEX.Net पर पड़ रहे है।

तो कुछ देर बाद वो हमारे पास आई और यह कहकर चली गई कि वो अपने किसी काम से बाहर जा रही है और शाम तक लौटकर आने वाली थी.. इसलिए अब रेणु और में घर पर अकेले थे। तो मैंने रेणु को कहा कि अब बताओ मुझे यहाँ पर बुलाकर क्या करना है? तो वो बोली कि आज में और तुम एक पति, पत्नी बनकर सुहागरात मनाएँगे। तो मैंने कहा कि लेकिन में कंडोम लेकर नहीं आया.. क्या में कंडोम लेकर आ जाऊँ? तो वो बोली कि वो मैंने अपने पास पहले ही रख लिये है.. मैंने अपने दोस्त से मंगवाए है। तो मैंने कहा कि तुम लाओ.. तो वो बोली कि अरे वो यहीं पर मेरे पास है। फिर मैंने कहा कि बताओ कहाँ पर है और तुम दुल्हन की तरह तैयार हो जाओ। वो बोली कि तुम चादर उठाओ.. तभी मैंने चादर उठाकर देखा कि वो पहले से ही तैयार थी और उसके हाथ में कंडोम का पैकेट भी था। फिर में अपने हाथ से उसके बदन को सहलाने लगा तो वो शरमाने लगी और में उसको गले लगाकर उसके सारे कपड़े धीरे से उतारने लगा.. पहले साड़ी का पल्लू, फिर ब्लाउज, फिर पेटिकोट और फिर उसकी ब्रा खोली। तो वो मुझसे चिपक गई.. मैंने उसको बाहों में लिया और उसको कसकर जकड़कर किस किया। फिर में उसकी पेंटी के ऊपर पर से हाथ घुमाने लगा और फिर उसकी पेंटी गीली होने लगी तो मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया और उसे लेटा दिया और अपने सारे कपड़े उतार दिए। तभी वो मेरा बड़ा लंड देखकर बहुत खुश हो गई और मेरे लंड को पकड़कर हिलाने लगी और फिर मुहं में लेकर चूसने लगी और दबा दबाकर चूसने लगी। करीब 5 मिनट बाद में झड़ने वाला था तो मैंने कहा कि में झड़ रहा हूँ और उसने फिर मेरे लंड को मुहं में लिया और पूरा पानी पी गयी और मुझसे बोली कि यह बहुत स्वादिष्ट था। फिर हमने एक एक करके एक दूसरे के लंड और चूत चाटी। फिर में और वो 6-9 पोज़िशन में लेट गये.. मैंने पहले उसकी चूत में उंगली डालकर अच्छे से हिलाया और फिर अपनी जीभ को चूत पर लगाकर चूत में अंदर बाहर करके हिलाने लगा और फिर चूसने और चाटने लगा। फिर हम दोनों मोन करने लगे और कुछ देर के बाद वो कहने लगी कि अब में झड़ने वाली हूँ। तो में उसकी चूत के दाने को ओर ज़ोर-ज़ोर से चाटे जा रहा था और फिर वो झड़ गई। फिर उसने पूरी तरह से झड़ने के बाद मेरे लंड को पकड़ा और लंड को कंडोम पहनाया और लंड को चूसकर फिर से टाईट किया। तो जब मेरा लंड खड़ा हो गया तब मैंने उसके दोनों पैर फैला दिए और अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक ज़ोर का धक्का लगाया तो तभी मुझे पता चला कि वो वर्जिन थी और मेरा लंड अभी थोड़ा ही उसकी चूत में गया था.. लेकिन उसको बहुत दर्द हुआ और वो ज़ोर से चिल्लाने लगी आईईई अह्ह्ह माँ मार दिया। इसे बाहर निकाल दो.. वरना में मर जाऊंगी और मैंने उसकी एक ना सुनी.. एक और ज़ोर का धक्का मारा तो वो और ज़ोर से चिल्लाई आहह उह्ह्ह माँ मर गई।

फिर में धक्के पे धक्के लगाता गया और 5 मिनट के बाद मेरा लंड बड़े आराम से अंदर बाहर होने लगा और वो मोन करने लगी.. वो बोली कि चोदो मुझे और ज़ोर से ज़रा और ज़ोर से और तेज़ी से मेरी चूत के अंदर आग लगी है आज बुझा दो.. आहह और ज़ोर से मारो मेरी हाहा आहा। फिर करीब 25 मिनट के बाद वो बोली कि में झड़ने लगी हूँ। तो में और भी तेज हुआ और बोला कि में भी अब झड़ने वाला हूँ और वो बोली कि हाँ में भी आईईईई और हम दोनों एक साथ झड़ गए और एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर लेटे रहे.. वो मेरी इस चुदाई से बहुत खुश नजर आ रही थी और जब मैंने उसकी चूत से लंड को बाहर निकाला तो उस पर थोड़ा उसकी चूत का खून लगा था।

दोस्तों उसके कुछ देर बाद हमने फिर से चुदाई शुरू कर दी और मैंने इस बार उसे कुतिया बनाकर चोदा। वो मेरी इस चुदाई से बहुत खुश हो गई और मैंने इस दो दिनों में उसे कई बार चोदा और उसकी चूत की आग को ठंडा किया.. लेकिन उसकी चूत में मेरा लंड जाने के बाद उसकी आग और भी बड़ चुकी थी। तो मैंने कई बार मौका पाकर कभी उसे मेरे घर में और कभी उसके घर में तो कभी रात को छत पर चोदा ।।

धन्यवाद …