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बीवी को चुदते हुए देखा – 2

प्रेषक : अरमान …

“बीवी को चुदते हुए देखा – 1” से आगे की कहानी …

तो दोस्तों फिर अंकल ने मेरी बीवी का सर पकड़ा और लंड की तरफ झुकाया और बोला कि पूरा लंड मुहं में लो.. लेकिन मुझे नहीं लगता था कि पूरा उसके मुहं में जा पाएगा। फिर भी छवि ने अपना पूरा मुहं खोला और पहले लंड के सुपाड़े को मुहं में डाला। उनका सुपाड़ा ही इतना बड़ा था कि छवि का मुहं भर गया। फिर छवि ने अपने दोनों होंठ अंकल के लंड के आस पास ऐसे घुमा दिए जैसे अभी पूरा अंदर खींच लेगी और वैसा ही हुआ.. उसने पूरा लंड अपने मुहं में डाल लिया.. लेकिन मुझे यकीन नहीं हुआ कि उनका आधे से ऊपर ज्यादा लंड छवि के मुहं के अंदर था। फिर भी उन्होंने छवि का सर दबाया और पूरा लंड अंदर तक लेने को कहा.. लेकिन पूरा अंदर करते करते उसकी आँख से पानी निकल गया और उसने पूरा लंड बाहर निकाल दिया। मैंने देखा कि पूरा लंड गीला हो गया था और छवि का मुहं जैसे खुला का खुला ही रह गया। तो अंकल ने उससे पूछा कि कैसा लगा? तो उसने इशारे में कहा कि मज़ा आ गया और लंड को एक हाथ से पकड़कर अपने मुहं में अंदर बाहर करने लगी। अंकल भी उछल उछलकर मज़ा ले रहे थे.. फिर..

अंकल : क्यों आज कुछ और मज़े करने है?

छवि : सर हिलाते हुए हाँ कहा.. कि क्या मज़े करोगे?

अंकल : एक मिनट रूको.. कंप्यूटर चालू करो।

छवि : चालू ही है।

अंकल ने उठकर अपनी पेंट को लिया और उसकी जेब में से एक पेन ड्राईव निकाला और कंप्यूटर में लगाया

छवि : क्या ब्लूफिल्म है?

अंकल : हाँ।

छवि : मैंने बहुत देखी है.. अरमान जब भी करते है चालू कर देते है।

अंकल : लेकिन यह थोड़ी अलग है।

छवि : क्यों ऐसा क्या खास है इसमे?

अंकल : तुम देखो तो सही खुश हो जाओगी और सारी थकान मिट जाएगी।

छवि : ठीक है दिखाओ।

अंकल : हाँ दिखता हूँ बस आ जाओ अब पास में।

छवि को अंकल ने अपनी गोद में बैठा लिया और बेड पर बैठ गये। तो मैंने देखा कि छवि के दोनों पैरों के बीच में से अंकल का मोटा लंड निकला हुआ था और छवि की पूरी चूत ढक गयी थी। तभी थोड़ी देर में फिल्म चालू हुई वो आफ्रिकन आदमी की थी और वो किसी गोरी मेडम के साथ थी। वो गोरी उसे सक कर रही थी और उसका मोटा और तगड़ा लंड देखकर छवि के चहरे के हावभाव बदल रहे थे और में छवि की तरफ ही देख रहा था। छवि ने अंकल के लंड को एक हाथ से पकड़ रखा था और अंकल छवि के बूब्स को दबा रहे थे.. इतने में फिल्म में आफ्रिकन आदमी का एक दोस्त आया और वो दोनों गोरी को चोदने लगे। तो वो देखकर छवि के होश उड़ गये।

छवि : बाप रे दोनों एक साथ में।

अंकल : हाँ ऐसे बहुत मज़ा आता है।

छवि : उसमे मज़ा क्या? बैचारी की हालत खराब हो जाती है।

अंकल : नहीं.. कुछ नहीं होता.. बहुत मज़ा आता है क्या तुमने कभी ट्राई किया है?

छवि : नहीं.. कभी नहीं। मुझे तो बहुत डर लगता है।

अंकल : कुछ नहीं होता उसमे।

छवि : नहीं बाबा तुम्हारा ही इतना मोटा है.. मुझे तो इससे ही बहुत डर लगता है।

अंकल : इसमे डरने की क्या बात है? जितना मोटा हो उतना ज़्यादा मज़ा देता है।

छवि : वो तो है.. लेकिन मुझे तो डर लगता है।

अंकल : अगर एक बार दो को एक साथ ट्राई करोगी तो खुश हो जाओगी।

छवि : ना बाबा.. मुझे तो सच में बहुत डर लगता है।

अंकल : कुछ नहीं होता।

छवि : नहीं अंकल प्लीज।

अंकल : अरे कुछ नहीं होगा.. अगर ऐसा हो तो एक के बाद एक ट्राई करना।

छवि : नहीं।

अंकल : छवि डार्लिंग ट्राइ करने में क्या जाता है? अगर मज़ा ना आए तो में अकेले ही करूँगा और वो सिर्फ़ देखेगा ठीक है।

छवि : नहीं अंकल किसी को पता चल गया तो बहुत दिक्कत होगी।

अंकल : क्यों हमारे बारे में आज तक किसी को पता चला?

छवि : लेकिन कुछ दिक्कत तो नहीं होगी ना?

अंकल : तुम्हे मुझ पर भरोसा है ना।

छवि : हाँ वो तो है।

अंकल : बस तो फिर में क्या उसे कॉल करूं?

छवि : किसको कॉल कर रहे हो?

अंकल : एक दोस्त है।

छवि : कौन?

अंकल : अरे तुम एक बार देखो फिर पहचान जाओगी और वो आए तब तक हम ये फिल्म देखते है और उसमे क्या करते है वो तुम ज़रा ध्यान से देखो? और थोड़ी देर बाद तुम्हे भी ऐसे ही मज़ा लेना है। फिर मैंने छवि को देखा तो वो फिल्म को इतना मजा लेकर देख रही थी जैसे उसको भी वो सब करना है। तो करीब 10 मिनट ही हुए होंगे कि दरवाजे पर बेल की आवाज़ आई.. अंकल चादर लपेट कर गये और दरवाजा खोला और दरवाजा बंद होने की आवाज़ आई। तभी थोड़ी देर के बाद मैंने देखा कि अंकल जैसा ही एक तगड़ा पंजाबी कमरे में आया। छवि ने कुछ नहीं पहना था और बेड पर बैठी हुई थी वो दूसरे मर्द को देखकर चकित हो गई और बोली कि अंकल यह तो हमारे ही पीछे वाले बंगले में रहते है और यह सतपाल अंकल है ना। तो भूपी अंकल ने कहा कि हाँ वही है छवि थोड़ी देर तो चकित हो गयी। दोस्तों ये कहानी आप AntarvasnaSEX.net पर पड़ रहे है।

तभी थोड़ी ही देर में सतपाल जी ने छवि को छूना शुरू कर दिया और छवि ने उनको देखा और सतपाल जी ने आँखो से इशारा किया और छवि ने सतपाल जी की भी पेंट उतार दी और उन्होंने अंदर एकदम टाईट अंडरवियर पहना था। तो लंड के कारण वो अभी फट जायगी ऐसा लग रहा था छवि ने थोड़ी देर अंडरवियर के ऊपर से ही लंड को सहलाया और सतपाल जी के सामने देखकर ऐसे हावभाव देने लगी कि बहुत मोटा और तगड़ा लंड है आपका सतपाल जी ने छवि का सर पकड़कर उसका मुहं अपने अंडरवियर पर लगाया। तो छवि ने वहाँ पर किस किया और अंकल के सामने देखकर दोनों हाथ अंडरवियर पर रखकर इशारा किया कि अंडरवियर उतार दूँ। तो सतपाल जी ने इशारे से कहा कि ठीक है और जैसे ही छवि ने अंडरवियर उतारा तो उनका लंड उछलकर जैसे ही बाहर आया। मैंने देखा कोई आफ्रिकन काले लंड से कम नहीं था.. वो मोटा तगड़ा लंड था और एकदम लंबा था.. लेकिन अभी तक पूरा टाईट नहीं हुआ था। फिर भी छवि के हाथ की गोलाई में नहीं समा रहा था.. छवि ने भूपेन्द्र सिंह के सामने देखा और हंसी।

भूपेन्द्र सिंह छवि से बोले : कैसा है? बोल मज़ा आएगा या नहीं?

छवि : आज तो लगता है में मर ही जाउंगी।

सतपाल जी : छवि कुछ नहीं होगा।

छवि : क्या कुछ नहीं होगा जब इतना बड़ा यह अंदर जाएगा में मर ही जाउंगी।

भूपेन्द्र सिंह : नहीं डार्लिंग कुछ नहीं होगा.. मेरा जब पहली बार गया था तो कुछ हुआ था?

सतपाल जी : सुनो हम दोनों तुमको इतना मज़ा देंगे कि तुम्हारा पति कभी नहीं दे पाएगा।

छवि : हाँ वो तो तुम्हारा लंड देखकर ही लग रहा है.. लेकिन मुझे तो बहुत डर लगता है।

भूपेन्द्र सिंह : कुछ नहीं होगा डार्लिंग.. तुम हटो ज़रा मुझे बेड पर आने दो.. यह कहकर भूपेन्द्र सिंह बेड पर सो गये और छवि को इशारा करते हुए बोला कि लंड चूसो। तो छवि भूपेन्द्र सिंह के दोनों पैरों के बीच में बैठकर दोनों हाथों से उनका लंड पकड़कर हिलाने लगी और फिर धीरे से किस किया और सतपाल जी वहाँ पास में खड़े खड़े छवि के बूब्स दबा रहे थे। फिर छवि ने धीरे धीरे भूपेन्द्र सिंह का पूरा लंड उसके मुहं में ले लिया और इधर सतपाल जी ने छवि की गांड पर हाथ लगाया और गांड थोड़ा ऊपर करने का इशारा किया.. छवि ने अपनी गांड ऊपर उठाई। अब वो डॉगी स्टाईल में आ गयी और बेड पर सोए हुए भूपेन्द्र सिंह के लंड को पूरा मुहं में ले रही थी और दूसरी तरफ सतपाल जी बेड के पास खड़े हुए थे। उन्होंने छवि को कमर से पकड़कर बेड के किनारे खींच लिया और उनका तगड़ा मोटा लंड छवि की गांड पर छू गया। छवि ने पीछे देखा तो सतपाल जी छवि की चूत में लंड डालने वाले थे.. तो छवि ने इशारे से मना किया.. लेकिन वो बोले कुछ नहीं होगा। छवि ने पास में पड़ी हुई तेल की बॉटल से थोड़ा तेल लिया और अपनी चूत पर लगाया सतपाल जी अंदर डालने ही वाले थे कि उनको कहा कि एक मिनट रुकिये और फिर से थोड़ा तेल हाथ में लिया और सतपाल जी के लंड पर लगाया और कहा कि बस अब धीरे धीरे जाने दो।

सतपाल जी ने जैसे ही छवि की चूत पर अपना लंड रखा तो छवि थोड़ी डर गयी.. सतपाल जी ने छवि की कमर में हाथ डाला और उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया ताकि वो ना हिले। फिर सतपाल जी ने अपने लंड सुपाड़ा छवि की चूत पर रखा और धीरे से धक्का दिया.. लेकिन वो इतना मोटा और तगड़ा था कि एक झटके में अंदर जाने वाला नहीं था। तो उन्होंने छवि के दोनों पैरों को हाथ से इशारा किया कि वो उसके पैर थोड़े चौड़े करे जिससे चूत का छेद खुल जाए और जैसे ही छवि ने पैर फैलाए सतपाल जी ने छवि की कमर पकड़कर लंड को धक्का लगाया और आधे से ज्यादा लंड छवि की चूत में चला गया। छवि के मुहं से चीख भी निकल गयी और भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सतपाल ज़रा धीरे.. मर जाएगी वो बैचारी और छवि की आखों से पानी निकल गया और छवि लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन सतपाल जी ने उसकी कमर कसकर पकड़ी हुई थी ताकि वो हिल ना पाए थोड़ी देर ऐसे ही सतपाल जी ने अपना आधा लंड छवि की चूत में रहने दिया। दूसरी तरफ छवि भूपेन्द्र सिंह की जांघो पर हाथ रखकर उनके लंड को चूस रही थी.. सतपाल जी ने तेल की बॉटल उठाई और थोड़ा तेल अपने लंड पर डाला और देखा कि छवि का ध्यान लंड चूसने में है तो सतपाल जी ने भूपेन्द्र सिंह की तरफ़ देखा और इशारा किया। तो भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि एक मिनट और छवि का सर भूपेन्द्र सिंह ने हाथ में पकड़ लिया और सतपाल जी को इशारा किया कि जाने दो अन्दर.. सतपाल जी ने एक ज़ोर का धक्का मारकर पूरा लंड छवि की चूत में घुसा दिया। छवि चीखने ही वाली थी कि भूपेन्द्र सिंह ने छवि के मुहं को अपने लंड पर दबा दिया और मुहं में पूरा लंड डाल दिया और छवि का सर लंड पर दबाए रखा। में कांच में से देख रहा था और मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जैसे कोई ब्लू फिल्म चल रही हो। दोनों हट्टे कट्टे तगड़े पंजाबी मर्द मिलकर मेरी बीवी को ऐसे चोद रहे थे जैसे कोई ब्लू फिल्म की हिरोईन को उठाकर लाए हो। तभी थोड़ी देर बाद छवि ने मुहं से लंड बाहर निकाला और मुहं से आवाज़ निकाली आहह फिर पीछे देखा। तो सतपाल जी उसकी कमर पकड़कर खड़े थे और उनका मोटा लंड पूरा उसकी चूत में था। छवि ने सर हिलाकर इशारा करते हुए कहा कि मर गई। तो भूपेन्द्र सिंह ने कहा क्यों छवि मज़ा आया? तो सतपाल जी बोले क्यों नहीं आएगा? तो छवि ने सतपाल जी की तरफ देखा और बोला कि बहुत आया।

फिर जैसे ही सतपाल जी को छवि का इशारा मिला तो उन्होंने लंड को बाहर निकाला और फिर से ज़ोर से धक्का देकर पूरा लंड अंदर दबा दिया और उनके धक्के से छवि पूरी हिल गयी थी.. लेकिन उसे मज़ा आने लगा तो उसने अपनी गांड आगे पीछे करना शुरू कर दिया। सतपाल जी ने भी अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और दूसरी तरफ भूपेन्द्र सिंह छवि के मुहं में पूरा लंड अंदर बाहर कर रहे थे और उनका लंड छवि के थूक से गीला हो गया था। फिर करीब 20-25 मिनट तक ऐसे ही चला.. सतपाल जी छवि को चूत में धक्के देते रहे और भूपेन्द्र सिंह छवि को मुहं में लंड चुसवाते रहे। थोड़ी देर बाद भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सतपाल तू इधर आ जा और तू भी देख कि तेरा लंड छवि के मुहं में पूरा अंदर जाता है कि नहीं और सतपाल जी बेड पर आकर लेट गये और अब भूपेन्द्र सिंह छवि के पीछे खड़े हो गये और छवि की चूत में लंड डाल दिया.. लेकिन छवि को इतना दर्द महसूस नहीं हुआ.. क्योंकि छवि भूपेन्द्र सिंह के लंड को बहुत बार ले चुकी थी और अभी अभी सतपाल जी का मोटा तगड़ा लंड अंदर जाकर आया था.. लेकिन दूसरी तरफ सतपाल जी का लंड चूत में जाकर आया था तो एकदम चमक मार रहा था और तनकर गधे के लंड की तरह बड़ा हो गया था।

तो उसको देखकर छवि ने जैसे ऐसा मुहं बनाया कि जैसे वो डर गयी.. सतपाल जी ने आखों से इशारा किया कि मुहं में डालो। छवि ने सिर्फ़ सुपाड़ा ही मुहं में डाला था.. सतपाल जी ने उसका सर पकड़कर आधा लंड छवि के मुहं में डाल दिया। छवि थोड़ा थोड़ा करके मुहं में लेने लगी.. 10-15 मिनट ऐसे ही चलता रहा। फिर मैंने देखा कि भूपेन्द्र सिंह ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और मुझे लगा कि उनका निकलने वाला है। तो छवि ने भी अपनी गांड आगे पीछे करके साथ देना शुरू किया। भूपेन्द्र सिंह कहने लगे आहह छवि मेरी डार्लिंग तेरी चूत आआहह और उन्होंने स्पीड एकदम बड़ाई और चुदाई करने लगे और छवि की कमर को कसकर पकड़े हुए थे और थोड़ी ही देर में उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला। मैंने देखा तो उन्होंने अपना सारा माल छवि की चमकती हुई गांड पर गिरा दिया और उस पर अपना लंड घुमाने लगे.. मुझे साफ साफ दिख रहा था कि छवि की चूत फटकर भोसड़ा हो गयी थी। फिर वो छवि को कमर से पकड़े हुए थोड़े ऊपर हुए और बचा हुआ सारा माल छवि की गांड पर ही निकल गया।

उधर दूसरी तरफ सतपाल जी ने छवि को लंड चटवाने में कोई कमी नहीं रखी थी। सर के बाल पकड़कर छवि का मुहं अपने लंड की तरफ झुका रहे थे और छवि ने भी कसकर उनकी जांघे पकड़ी हुई थी। छवि अब उनकी जांघो पर नाख़ून मारने लगी थी.. मुझे पता चल गया कि छवि अब झड़ने वाली है। तभी सतपाल जी ने नीचे से छवि के मुहं में धक्के लगाने शुरू किए और कहने लगे कि अहह डार्लिंग बड़ा जबरदस्त चूसती है साली। छवि भी अपनी गांड उछाल उछालकर उनका लंड मुहं में लेती रही। तभी छवि ने कसकर उनकी जांघे पकड़ ली और एकदम पूरे शरीर को जैसे खींच लिया। तो में समझ गया कि वो अब झड़ गयी है और उतने में ही सतपाल जी ने अपने पैर एकदम खींचकर टाईट कर लिए शायद वो भी झड़ने वाले थे। छवि झड़ चुकी थी और वो सतपाल जी के लंड को मुहं से बाहर निकालना चाहती थी.. लेकिन सतपाल जी ने उसका सर अपने लंड पर दबाकर रखा और चूसने को कह रहे थे। छवि मना कर रही थी.. लेकिन सतपाल जी ने सर को लंड के ऊपर पूरा ज़ोर से दबाया और सतपाल जी के मुहं से ज़ोर से आवाज़ निकली आआहह आआहह मुझे पता चल गया कि वो झड़ने वाले है.. लेकिन जैसे ही मैंने देखा कि उन्होंने छवि का मुहं अपने लंड पर कसकर दबाया और फिर छोड़ दिया। छवि ने जैसे ही अपना सर ऊपर उठाया तो में तो देखता ही रह गया.. छवि के मुहं में उनका लंड था और लंड के आस पास वाली थोड़ी जगह से सतपाल जी का सारा माल छवि के मुहं से उनके लंड पर होते हुए नीच जा रहा था और मुझे पता चल गया कि छवि का मुहं पूरा सतपाल जी के माल से भर गया था।

छवि ने मुहं से जैसे ही लंड बाहर निकाला तो सारा माल सतपाल जी के लंड के ऊपर गिरने लगा और छवि ने दोनों हाथों से लंड के ऊपर गिरे हुए माल को लंड पर रगड़ा.. पूरा लंड गीला हो गया था। तभी सतपाल जी छवि की तरफ देखने लगे.. छवि ने भी सतपाल जी की तरफ देखा और हल्की सी स्माईल दी और आंख से ऐसा इशारा दिया जैसे वो पूरी तरह संतुष्ट हो गयी है और फिर दोनों मेरे ही बेड पर छवि को बीच में लेकर लेट गये और थोड़ी देर बाद भूपेन्द्र सिंह उठकर बाथरूम चले गये।

सतपाल जी : मज़ा आया?

छवि : हाँ बहुत।

सतपाल जी : कभी भी मन करे तो बुला लेना।

छवि : हाँ ज़रूर बुलाऊंगी.. लेकिन किसी को पता ना चले।

सतपाल जी : तुम उसकी फ़िक्र मत करो.. हम दोनों के अलावा किसी को पता नहीं चलेगा।

उतने में भूपेन्द्र सिंह आए और सतपाल जी वॉशरूम चले गये और फिर दोनों फ्रेश होकर चले गये। छवि अभी तक बेड पर नंगी पड़ी थी और उन दोनों के जाने के बाद छवि ने कांच के सामने आकर दोनों पैरों को फैलाकर देखा उसका भोसड़ा कितना चौड़ा हो गया है और मन ही मन में बहुत खुश हो गयी और में यह सब देख रहा था और फिर वो नहाने चली गयी। शाम को जब में घर पर आया तो ऐसे व्यहवार कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं.. लेकिन उसके चहेरे पर जो चमक थी वो सब बयान कर रही थी। फिर रात को जब मैंने उसे चोदा तो मैंने देखा कि उसकी चूत का भोसड़ा बना गया था और उस कारण से मेरा लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था.. लेकिन में चोदते टाईम बस वही याद कर रहा था जो मैंने दोपहर को देखा और शायद छवि भी वही सोच रही थी और मन में खुश हो रही थी और उसको देखकर में भी खुश हो गया और सोचता रहा कि कब दूसरी बार यह 2 इन 1 फिल्म देखने का मौका मिलेगा। तो दोस्तों यह थी मेरी बीवी की चुदाई ।।

धन्यवाद …

4 comments

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