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भाभी का मेरिज डे मनाया

प्रेषक : राज
मैं हूँ राज, उम्र 24साल, हाइट-5 फीट 8 इंच, परफ़ेक्ट बॉडी, दिल्ली मे रहता हूँ और अच्छी ख़ासी जॉब भी करता हूँ. कामुकता का ज़्यादातर पाठक अपना कहानी लिखने से अपने आपको रोक नही पता. मैं भी उसी मे से हूँ, एक नियमित पाठक जो कहानी पढ़-पढ़ कर अब अपनी भी लिखना चाहता है. ये सिर्फ़ एक कहानी नही बल्कि सच्चाई है. आज कल लड़का हो या लड़की सबके सब शादी से पहले ही सेक्स का मज़ा चख ही लेते है.
मैं तो बचपन से ही एक नंबर का चुडक्कड था. ख्यालो मे ही काम हो जाता था. लेकिन अब जवानी चरम पे है ख्यालो को हक़ीकत मे बदलने का समय आ गया है. और हमारी कोशिश जारी है. अब अपने कहानी पे आता हूँ.
बात ज़्यादा पुरानी नही ३ साल पहले की है, मेरे चाचा के लड़के की शादी होनी थी. सब कुछ लगभग तय हो गया था, सिर्फ़ कुछ नाप लेना था जैसे ब्लाउस लहंगा आदि. घर मे काफ़ी विचार विमर्श के बाद मुझे भैया के होने वाले ससुराल मे जाने को कहा गया. मैं भी अजीब से उत्साह और सोच मे पड गया था जैसे क्या बात करूँगा भाभी से? कैसी होगी वो? इंप्रेस कर पाऊँगा या नही?
अगले दिन पूरी तैयारी के साथ मैं भाभी से मिलने गया, एकदम निर्दोष और साफ सुथरे मान के साथ. वहाँ जाकर मेरा मन बदल गया और बदले भी क्यो ना. बिना शादी की भाभी क्या लग रही थी, शब्दो मे वर्णन करना मुश्किल है. कम से कम ३६ का बूब्स तो होगा ही उनका और इतनी भारी बूब्स वाली लड़की मेरे उपर कयामत लाने के लिए काफ़ी थी. खैर वहां काफ़ी स्वागत हुआ मेरा और भाभी ने भी बहुत प्यार जताया था. भैया से पहले मैने ही देखा था भाभी को. पहली मुलाकात के बाद ही हम दोनो के बीच कुछ हो गया.
फिर कुछ दिनो बाद शादी हो गयी. भाभी मेरे घर मे आ गयी. मैं प्यासा मौके की तलाश मे था लेकिन भाभी की प्यास तो भैया बुझा रहे थे. उन्हे मेरी फ़िक्र कहाँ थी।
करीब एक महीने बाद भैया को वापस जॉब पे जाना था, वो भाभी को ले जाना चाहते थे लेकिन घरेलू वजह से प्लानिंग किया गया भाभी ६ महीने बाद जाएगी तब तक घर को अच्छी तरह समझ जाएगी. भैया वापस चले गये मैं मन ही मन बहुत खुश था. लेकिन अपने मन की बात मैने कभी किसी के सामने जाहिर नहीं किया था यहा तक की भाभी के सामने भी नही.
अब मुझे भाभी की हरकतो से ऐसा लगने लगा था की भाभी को मेरी ज़रूरत है.
अब हम दोनो ही ऐसे मौके की तलाश मे हरदम रहते जब घर मे कोई ना हो.
फिर खूब हँसी मज़ाक होती, मज़ाक मे उन्हे छूने मे एक अजीब सुखद आनंद आता था. कभी कभार मज़ाक-मज़ाक मे भाभी के बूब्स मेरे से छू जाता तो वो कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं देती इससे मेरा हौसला और बढ़ जाता था.
ऐसे ही शादी को एक साल पूरे होने वाले थे और हमारे बीच कोई गहरा शारीरिक रिश्ता नही हुआ था,इस बीच भैया एक बार आये भी और चले भी गये.
शादी के साल पूरे होने पर मेरेज़ डे मानने का प्रोग्राम था लेकिन भैया को ऑफीस से अवकाश नही मिल सका.
मेरेज़ डे के दिन सयोंग ऐसा था की घर के लोगो को रिशतेदारों के यहाँ जाना पड गया सिर्फ़ मैं भाभी और मेरा कजिन रह गया था. मैं मार्केट से भाभी के लिए गिफ्ट लाने गया, वापस आते आते शाम हो गयी. जब घर आया तो भाभी भैया से मोबाइल पर बात कर रही थी. और छोटा भाई कही बाहर गया था. भाभी को पता नही था की मैं गिफ्ट लाया हूँ. उनके सामने गिफ्ट प्रेज़ेंट किया तो ख़ुशी साफ चेहरे पर झलक रही थी. मैं उन्हे बात करने मे डिस्टर्ब नही करना चाहता था इसलिए उनके पास बैठ गया.
बात करते करते वो लेट गयी भैया कुछ रोमेंटिक बाते कर रहे थे. भाभी भी रोमेंटिक हो रही थी लेकिन मेरे होने से ज़्यादा नही बोल रही थी. अब मैं भी भाभी के बगल मे लेट गया, पागल बना देने वाली खुशबू आ रही थी उनके बदन से, मैं मदहोश हो रहा था, कुछ देर ऐसे ही मज़ा लेता रहा. फिर लेटे हुए ही अपना एक हाथ मैने भाभी के पीठ पर रख दिया उन्होंने हटाया भी नही. मैं अब भाभी के कान के पास सट गया ताकि भैया की बाते सुन सकूँ. हम दोनो के बीच अब कोई दूरी नहीं बची थी सिर्फ़ कपडे बच गये जो खलल डाल रहे थे. लेकिन ये सब सिर्फ़ मैं सोच रहा था मेरी कोशिश हो रही थी, कही ना कही मेरे मन मे डर था की कही भाभी कुछ बोल ना दे, डाँट ना दे, सो हर कदम फूँक फूँक कर रख रहा था.
अब मैने धीरे से अपना एक पैर भाभी के मस्त गोल मांसल चूतड पर रख दिया, एक बार भाभी ने हटा दिया मैने फिर कुछ देर बाद वापस रख दिया। भाभी भैया की बातो मे व्यस्त थी. धीरे धीरे मैने पूरी तरह भाभी को बाँहो मे घेर सा लिया. कुछ देर ऐसे ही रहा फिर अपने पैरो को भाभी के चूतड पर साड़ी के उपर से ही सहलाने लगा. उन्हे अब अच्छा लगने लगा था. मैं उनके बूब्स छूना चाहता था. अपने बाए हाथ से भाभी को पीठ के उपर से पकड के दाएँ हाथ को भाभी के बूब्स पर फिराने लगा ये सब इतना धीरे धीरे आराम से किया की भाभी को पता भी ना चला की मैने शुरू कब किया था लेकिन उनको तो अब मज़ा आने लगा था. एक तरफ अपने पति से रोमेंटिक बाते कर रही थी दूसरे तरफ देवर उन्हे पति के वही होने का अहसास करा रहा था.
मुझे अब बहुत आनंद आने लगा था क्या मांसल चूची थी भाभी की। कुछ ही देर मे मुझे अहसास हुआ की बूब्स अब कड़क होने लगे थे. भाभी की साँसे गरम हो रही थी, बस भैया से बात करने के कारण वो नही बोल पा रही थी। अगर वो कुछ भी बोलती तो भैया को पता चल जाता की वहां मैं हूँ और फिर शक हो सकता था. इसी परिस्थिति का फ़ायदा मेरे हाथो ने उठना सुरू कर दिया और मैं अपने मदहोश सेक्सी भाभी के सुडोल कड़क चूचे को दबाने लगा. थोडी देर उपर से ही खेलने के बाद अब मैं ब्लाउज के अंदर हाथ डालने लगा, और डाल भी दिया मैं यहाँ बता नही सकता की कितना मुलायम लग रहा था भाभी का बूब्स, मेरे हाथ ने अपने कारनामे दिखाते हुए निप्पल को छुआ, तभी भाभी की बाते ख़त्म हो गयी और वो अचानक से पलटी और मेरे से दूर हो गयी. और बोली “ये आप क्या कर रहे थे”?
मुझे थोडी सी बनावटी नाराज़गी सा महसूस हुआ जिसे मैने पल भर मे समाप्त कर दिया.
कुछ जवाब देने के बदले मैने भाभी के पास जाकर सीधे उन्हे किस करना चालू कर दिया उन्होने भी बिना विरोध के मेरा साथ दिया और फिर जोरदार किसिंग हुई. तभी मेरा मोबाइल बजने लगा….पापा का कॉल आ रहा था रिसीव किया तो बोले जल्दी बाहर आओ वो घर के बाहर गेट खुलने का इंतजार कर रहे थे. मैं अनचाहे मन से जाने लगा तो भाभी बोली आपको अब जाने नही दूँगी आपने मेरी भूख को जगा दिया है इसे अब आपको ही मिटाना होगा.
मैं इस वादे के साथ कि आज आपकी मेरेज़ डे वाली सुहाग-रात को सूनी नही होने दूँगा कह के बाहर निकल गया.
बाहर पापा को पेपर दिया और वो बाहर से ही निकल गये बोले की कल शाम तक ही आ पाऊंगा, और चले गये….मेरी तो बल्ले बल्ले हो गयी थी.
शाम तो हो ही चुकी थी अब जल्दी से रात होने का इंतजार करने लगा.
वो भी हुई लेकिन काफ़ी इंतजार के बाद…मेरा मतलब इंतजार की घड़ी वाकई लंबी हो गयी थी.
भाभी ने स्पेशल खाना बनाया था हम तीनो (मैं भाभी और मेरा भाई) ने खूब मज़े मे खाया….
लेकिन भाभी की आँखे बीच बीच मे मेरी आँखो से मिल जाती और बहुत कुछ कह जाती…..पहली बार हमने आँखो से भी सेक्स करना सीख लिया था.
मेरी प्यारी भाभी सिर्फ़ भाभी नही बल्कि सेक्स की देवी है सेक्स की टीचर है सेक्स का प्रतिबिंब है….उनको अंग अंग मे आकर्षण है हर अदा मे आकर्षण है.
भोजन ख़त्म हो गया अब चोदने की बारी थी.
मैं भाभी को चुपके से बता दिया की आधे घंटे बाद आता हूँ तब तक “शिवम” को किसी तरह सुला दे,और चला गया मार्केट की तरफ.
आधे घंटे बाद जब वापस आया तो भाभी ने अपना काम पूरा कर दिया था. शिवम सो गया था,तसल्ली के लिए हमने उसका कमरा बाहर से भी बंद कर दिया.
अब मैं भाभी के रूम मे गया….
रूम का वातावरण……मौसम…….महॉल……खुश्बू…..से मैं दंग रह गया.
भाभी किसी नयी दुल्हन के तरह सज के बैठी थी…जैसे आज सुहाग रात हो.
मैं भी आज भाभी को भैया के ना होने के अहसास को ना होने देना चाहता था.
पूरे मूड मे पलंग पे पहुँच गया….घूँघट उठाया तो भाभी मंद मंद मुस्करा रही थी.
अब मैने भाभी को धीरे से पलंग पे लिटा दिया और खुद भी बगल मे लेट गया……बिना बोले सब कम हो रहा था.
भाभी आज रात पूरी तरह मेरी थी इसलिए मैं कोई जल्दी नही करना चाहता था.
फिर उनके लिप्स पे अपने लिप्स को रख दिया और किसिंग सुरू हो गयी….क्या रसभरी लिप्स थे भाभी के इतने मज़े मैने पहले किसी लड़की के साथ भी नही लिए थे जितनी भाभी मुझे दे रही थी…मैं पूरा पी जाना चाहता था….करीब १० मिनट के किसिंग के बाद मैने साड़ी खोलना सुरू किया.
साड़ी उतरने के बाद, ब्लाउस फिर पेटिकोट…..अब पैंटी और ब्रा बचे थे भाभी के बदन पर.
आप अनुमान लगा सकते है की हुस्न की मल्लिका मेरी भाभी के गोरे बदन पर काले काले दो वस्त्र कैसे लग रहे होंगे? लेकिन उस समय उससे भी सुनहरी चीज़ उस काले वस्त्र के अंदर छुपे थे.
अब मैने भाभी के ब्रा को खोल दिया उनके दोनो कबूतर बाहर निकल आए. मैं उनकी मालिश सुरू कर दी.
दोनो बूब्स को चूसते चूसते लाल कर दिया.
15मिनट बूब्स के साथ खेलने के बाद प्यास लग गयी थी लेकिन पानी की जगह आज अमृत मिलने वाला था.
अमृत द्वार पे जो पैंटी पहनी थी भाभी ने वो मैने बिना समय गवाएं उतार दी……
क्या चूत थी? देखने पे कोई कह नही सकता था की पहले कभी ये लॅंड के झटके खा चुकी है…..क्लीन चूत….गुलाबी पूसी….गोरे गोरे जाँघो के बीच…..दुनिया का सबसे सुंदर नज़ारा मेरे सामने था.
उस जगह से नज़र हटने का नाम ही नही ले रहा था.
अब प्यासे मुँह को लगा दिया रसपान करने मे…..जीभ से ही मैं भाभी को चोद्ने लगा था…भाभी भी कमर उठा रही थी…जिसका मतलब था वो मज़े ले रही थी.
१० मिनट के बाद भाभी झड़ गयी, मैने सारा अमृत पी लिया.
अब भाभी उठी और मेरे लॅंड की तरफ बढ़ी मेरे पैंट खोलकर एक ही झटके मे लंड बाहर निकल लिया…..देखकर ख़ुशी से पागल हो गयी….बोली—इतना बड़ा????
मैने बोला हाँ- अभी 7 इंच का ही है चूसने पर 9 का हो जाएगा.
सुनते ही भाभी लोलीपोप की तरह अपने मुहं मे लंड ले लिया….फिर मुहं उपर नीचे करते हुए मेरे लंड को ही चोदने लगी.
5मिनट मे ही मुझे लगा मैं झडने वाला हूँ तो मैने भाभी से छोड़ देने को कहा.
भाभी लॅंड बाहर निकल कर देखना चाहती थी…की वाकाई 9 इंच का हुआ या नही देखकर बोली राज आज मैं तुम्हारे लंड की फ़ैन हो गई.
फिर मैने भाभी को पलंग पर लिटा दिया मुँह उपर करके, और दोनो पैरो को उपर करके फैलाकर जगह बनाई. अपने मोटे लंड को चूत के द्वार पर रखा…भाभी अभी से ही सिसकारी लेने लगी थी.
हल्का सा धक्का दिया तो भाभी धीरे से चिल्लाई थोड़ा धीरे राज.
फिर मैने धीरे धीरे ४-५ बार अपने कमर को हिलाया और एक जोरदार झटका दिया तो आधा से ज़्यादा लॅंड भाभी के चूत मे समा चुका था…. कुछ सेकेंड ऐसे ही रहने के बाद मैने कमर हिलना शुरू कर दिया….भाभी भी अब मज़े लेने लगी और सिसकारिया लेने लगी.
सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईईईईईईईईआआआआहह राज चोदो और और…….मेरा उत्साह और बढ़ जाता और तेज झटके लगा रहा था.
कुछ देर बाद मैने अपने पसंदीदा घोडी स्टाइल मे भाभी को सेट किया और पीछे से भाभी के चूत मे लॅंड डाल दिया इस बार पूरा पूरा चला गया …..फिर झटके भी तेज होने लगे..
भाभी के आवाज़ो से कमरा गूँज रहा था…..वो हम दोनो बेख़बर चुदाई का मज़ा ले रहे थे…..
भाभी बोली और तेज करो मैं झडने वाली हूँ……
मैने अपनी फुल स्पीड पकड ली….२ मिनट बाद हम दोनो एक साथ अपनी चरम सीमा पर पहुँच गये……
फिर कुछ देर साथ मे नंगे ही लेटे रहे……… उनका मेरीज़ डे बिना पति के भी सफल हो गया था.
 
धन्यवाद . .

One comment

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