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बहन को चुदाई सिखाते सिखाते चोद दिया (Bahan Ko Chudai Sikhate sikhate Chod Diya)

यह कहानी नहीं हकीकत है। अपना असली नाम इस कहानी में नहीं लिखूंगा। इस कहानी को लिखते वक्त ही मैं इतना गर्म हो गया था कि मैंने पूरी टाइपिंग केवल अंडरवियर में रहकर की।

मैं मीत.. जब 12वीं में था तथा मेरी बहन सेकंड इयर में थी। मुझे खुद पता नहीं था कि कभी ऐसा होगा।
मेरी बहन मस्त गोरी चिकनी है, उसकी फ़िगर 36-30-34 है, हमारे घर में मॉम-डैड और हम दोनों हैं।

मैं मेरी बहन के साथ एक कमरे में सोता था। मैं जमीन पर बिस्तर लगा कर सोता था। मुझे बहुत होमवर्क मिलता था तो मेरी पीठ में दर्द रहता था। एक बार मेरी मॉम के मोबाइल पर एडल्ट जोक्स की सर्विस एक्टिवेट हो गई। मुझे इस बारे में पता नहीं था। मेरी बहन ने 2-3 जोक्स पढ़े और हँसने लगी।

मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोली- ये देख कैसे जोक्स आए हैं।

मुझे पता नहीं था कि मेरी बहन ऐसे मामलों में सब समझने लगी है। अगले दिन फ़िर जोक्स आए.. मैंने वो मेरी बहन दिव्या को सुनाए.. तो वो उसे कुछ समझ में नहीं आया.. पर मैंने थोड़ा खुलकर उसे समझा दिया।

अब तो ये रोज का काम हो गया.. मुझे लगा दिव्या सब सीखना चाहती है।
मैंने उसे बताया- ऐसी फ़िल्में भी होती हैं।
उन दिनों हमारे पास मोबाइल नहीं था। सिर्फ मॉम के मोबाइल से ही काम चलाना पड़ता था।

मैं एक बात बताना चाहता हूँ कि मैं तब तक समझता तो सब था.. पर मैंने कभी मुठ नहीं मारी थी.. तो मैं हमेशा सेक्स के लिए मरता था। मुठ ना मारने की वजह से मेरा लौड़ा लगभग हमेशा सख्त रहता था। इस अहसास का मजा केवल मैं ही महसूस कर सकता हूँ। इस वजह से मुझे अपनी बाँहों में एक अलग ही मजबूती महसूस होती ही और मेरी छाती ज्यादा मजबूत है।

आप भी कभी 10 दिन तक बिना मुठ मारे रहना.. तो मर्दानगी का जो एक मजबूत अहसास होता है.. वो अलग ही होता है।

धीरे-धीरे मैं रोज अपनी बहन को कुछ ना कुछ सेक्स के बारे में बताता रहता था।
अन्तर्वासना की सेक्स स्टोरी के बारे में मेरे दोस्त मुझे बताते थे.. वो मेरे कमरे में मैं दिव्या को बताता था।
मैं अपना काम पूरा करता.. तब तक वो इन्तजार करती थी.. मतलब सोती नहीं थी।

मैंने उसे एक बार अन्तर्वासना की एक चुदाई की कहानी सुनाई.. तो उसे एक पोजीशन समझ में नहीं आई।
मैंने समझाने की कोशीश की.. पर वो नहीं समझी।
मैंने कहा- अब रहने दे..
तो वो नहीं मानी।

मैंने परेशान होकर कहा- करके समझाऊँ क्या.. तब आ जाएगा समझ में?
किस्मत से वो मान गई.. पर दिव्या ने कहा- मैं कपड़े नहीं खोलूँगी और लाइट बन्द कर दे।
मैंने कहा- ओके.. वो घोड़ी वाली पोजीशन थी।

मैंने दिव्या को पहले घोड़ी बनाया और उसे ऐसा ही रहने को कहा।

फ़िर मैंने पूछा- मैं कैपरी तो खोल लूँ..? वो मान गई.. मेरा लौड़ा तो खड़ा ही था। मैं उसके पीछे गया और चुदाई का एक्शन करके बताया।
हम दोनों को बहुत मजा आया।

ऐसे में रोज उसे पोर्न कहानी सुनाता था और एक्शन करके समझाता था।
अब तो मैं चाहता था कि मैं उसे चोद डालूँ..

अगली रात को उसे 69 वाला पोज समझ में नहीं आया। मैंने शर्त रखी कि तुझे भी अपनी कैपरी खोलनी पड़ेगी.. ऐसे समझ में नहीं आएगा।
वो मान गई।

मगर 69 के पोज में उसने मेरा लन्ड नहीं चूसा.. पर मैंने हल्की सी उसकी चूत चाटी।
दिव्या को ऐसे चड्डी में देख कर लन्ड मस्त कड़क हो गया था।

उसे मैंने यह बताया था कि लड़कों का हर वक्त खड़ा नहीं रहता.. उसने मुझसे ये बात पूछी थी.. तो मैंने बताया कि मैं मुठ नहीं मारता हूँ।
ऐसे ही मैं रोज उसे चड्डी में देख कर तड़प कर रह जाता था।

एक बार मैंने दिव्या से एक पोज में उसका टॉप भी खुलवा लिया..।
एक दिन मैंने उसे एक पोज बताया.. जिसमें लड़की करवट बदल कर लेटे हुए होती है और लड़का आकर उसकी गाण्ड में लन्ड डाल देता है।

उस पागल को ये समझ में नहीं आया.. मैंने पोज भी बनाया.. पर वो नहीं समझी.. मैंने कहा- पहले अपन दोनों पूरे नंगे हो जाते हैं।

थोड़ा कहने पर वो मान गई।
मैंने उसके चूतड़ों की दरार में अपना 6 इन्ची का लौड़ा फंसा दिया।

अब मुझसे कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था.. तो मैं हल्के-हल्के धक्के मारने लगा।
दिव्या बोली- ऐसा क्यों कर रहे हो?
तो मैंने कहा- तुम्हें समझाने के लिए..

फ़िर मैंने उसे घुमाकर पीठ के बल लेटा दिया और उसके मुँह पर हाथ रख कर दूसरे हाथ से लौड़ा उसकी चूत पर सैट करके जोर से धक्का लगा दिया। शायद वो एरोबिक किया करती थी.. इस वजह से उसकी सील टूट चुकी थी।

वो कुछ समझती.. इससे पहले मैंने उसके दोनों हाथों को फ़ैला कर अपने हाथों से दबा दिए और अपने पैरों से उसके दोनों पैरों को भी जकड़ लिया। वो चिल्लाये नहीं.. इसलिए उसके होंठों को मैंने अपने होंठों से दबा दिया और बिना कुछ सोचे मैं धक्के मारने लगा।

पहले तो 5 मिनट तक दिव्या ने मुझसे छूटने की बहुत कोशिश की.. पर मैं नहीं हटा.. पर फ़िर मैंने महसूस किया कि अब दिव्या भी नीचे से चूतड़ उछाल कर मेरा साथ दे रही है।
फ़िर मैंने उसके हाथों और पैरों को छोड़ दिया।

दिव्या को थोड़ा ऊपर उठाकर मैं उसे चुम्मी करने लगा।
वो मेरा साथ देने लगी.. नीचे से चुदाई चालू थी.. हम बेपनाह एक-दूसरे को चूम रहे थे.. ऐसा लग रहा था हमारी साँसें खत्म हो रही हैं.. हम एक-दूसरे के मुँह से सांस ले रहे थे।

हमें एक-दूसरे के शरीर में चिपटना अच्छा लग रहा था। एक-दूसरे को पी जाना चाहते थे.. अचानक उसने खुद को जोर से भींचा.. वो अकड़ने लगी।
मैं समझ गया कि दिव्या अब झड़ने वाली है.. तब भी मैं चोदता रहा।

उसके नाखून मेरी कमर पर गड़ गए.. पर मैं अभी नहीं झड़ा था।
जैसे ही दिव्या झड़ने लगी.. उसने मुझे जकड़ लिया, मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया.. मैंने उसे ‘लव यू’ कहा और एक प्यार भरा चुम्मा दिया।

अब हम दोनों एक-दूसरे के बदन को सहला रहे थे.. मैंने फिर से धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करना शुरू किया.. और उसके बोबे सहलाने लगा और चूसने लगा।
आप ही सोचो दोस्तो.. जिसकी बहन ऐसे आलिंगित हो.. जिसने अपनी बहन को ऐसे चोदा हो.. और अभी तक झड़ा ना हो.. उसकी क्या हालत होगी!
मैं अपनी हसीना को वापस तैयार कर चुका था।

मैंने दिव्या को इस बार कुतिया बनाया.. और अपना अपना 6 इंची लन्ड उसकी चूत में घिसने लगा.. वो भी पीछे बराबर धक्के लगा रही थी.. पर मैं कुछ ज्यादा जोश में था।

मैंने उसके हवा में हिलते हुए मम्मों को पकड़ लिया और उन्हें जोर-जोर से हाथों से दबाने लगा।

अब उस मस्त हुस्न की मलिका को मेरी इस हरकत से दर्द होने लगा.. पर चूत में बराबर मजा भी आ रहा था। उसने अपना मुँह तकिए में दबा लिया था.. जिससे आवाज बाहर ना जाए।

लन्ड और चूत की अभी भी लड़ाई चल रही थी। मैं अपने पूरे उफ़ान पर था। मैं चाह रहा था कि अपनी पूरी ताकत दिव्या को खुश करने में लगा दूँ। पूरा बिस्तर हिल रहा था। अब मैं झड़ने वाला था.. उसकी चूत गीली होने लगी.. वो फ़िर से झड़ रही थी.. मैं भी करीब ही था।

आखिरकार मैं भी इंसान था, मैं भी झड़ गया, मैंने फ़टाफ़ट अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और दिव्या को सीधा करके उसके मम्मों के बीच में लन्ड रख कर हिलाने लगा।
मैंने उसे कहा- प्लीज़ मेरे लिए अपना मुँह खोलो..

उसने खोला.. और मैंने उसके खुले हुए मुँह में वहीं से अपने वीर्य का निशाना लगाया।
हम दोनों एक-दूसरे पूरी तरह सतुष्ट थे.. हमारा जैसे बरसों का बंधा हुआ शरीर खुल गया था।
मैंने दिव्या से कहा- मैं तेरी चूत चाटना चाहता हूँ।

उसने मौन रह कर अपनी स्वीकृति दे दी। दिव्या आँखें बन्द करके लेट गई। फ़िर मैंने उसकी जांघें पकड़ लीं और उसकी चूत पर चुम्मियाँ देने लगा।
‘स्स्स्स्स्.. आह..उईई.. स्स्स्स..’ जैसी हल्की-हल्की सिसकारियाँ उसके मुँह से निकलने लगीं।

मैं मेरी बहन को जी भर के प्यार कर रहा था।, मैंने उसकी नाभि.. पेट.. चूचियाँ.. गाल सब जगह प्यार किया, इस बार दिव्या की चूत का पानी मैं पी गया।
हम इस सर्दी में नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।

रात को एक बार मेरी नींद खुली। मेरा लण्ड खड़ा था.. मुझे फ़िर सेक्सी दिव्या को चोदने की इच्छा हुई.. पर वो प्यारी सी अपनी नींद में बेफ़िक्र सो रही थी.. तो मैंने उसे नहीं जगाया।
मैंने उसे पीठ के बल लिटाया और अपना लौड़ा उसके चूतड़ों की दरार में डाल कर उसको बाँहों में भर के आराम से सो गया।

सुबह उसने मुझे उठाया, उठकर मैंने उसे एक पप्पी दी।

वो अपने कॉलेज चली गई.. मैं अपने…
शाम को दिव्या अपनी सहेली के घर गई.. तो मैं उसे बाइक पर छोड़ने गया। पूरे रास्ते में उसने अपने मम्मे मेरी पीठ से सटाए रखे। रात को खाना खाया और थोड़ी देर टीवी देखा, सर्दी का टाइम था.. तो हम सब जल्दी सो जाते हैं।

हम दोनों को सोने की कहाँ जल्दी थी, मॉम और डैड के कमरे में जाते ही हम एक-दूसरे को बेहताशा चूमने लगे।
मैंने कहा- आज क्या इरादा है मेरी रानी?
उसने कहा- आज मैं तुम्हें बाँध कर चुदूँगी।
मैंने पूछा- ये आईडिया कहाँ से आया?
तो बोली- तुमने मुझे एक बार ऐसी ही कहानी सुनाई थी ना.. उससे..

मैं मान गया.. उसने मुझे नंगा करके मेरे दोनों हाथ-पैर बिस्तर से बांध दिए। मेरा लौड़ा पहले ही कड़क था.. वो मेरे पास आई और मेरे लौड़े से खेलने लगी.. कभी मेरे पास आकर मुझे चुम्मी करती.. कभी मेरी छाती पर हाथ घुमाती। कभी अपनी जुल्फें मेरे चेहरे पर गिराती।
मैं बहुत बेताब हो रहा था, अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, मैं उसकी तरफ़ प्यासी निगाहों से देख रहा था।

वो मेरे मन की बात समझ गई और बोली- आज तो मेरे राजा तुम्हें बहुत तड़पाऊँगी।
अब उसने अपने एक-एक करके कपड़े उतारने शुरू किए.. उफ़ क्या बदन था उसका..
जैसे ही वो ब्रा-पैन्टी में आई.. मेरे से काबू करना और भी मुश्किल हो गया, मैंने लौड़ा सहलाते हुए कहा- अब चुद भी जाओ मुझसे..

वो आई और मेरे लौड़े पर बैठ गई और ऊपर-नीचे होने लगी।
मैंने भी नीचे से जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। उसकी दोनों हथेलियां बिस्तर पर जमी थीं और दम लगाते हुए खुद चुद रही थी.. या यूँ कहूँ कि मुझे चोद रही थी.. मुझे समझ नहीं आ रहा था।

उसकी स्पीड तेज हो गई। आज तो मैं भी बहुत उत्तेजित था.. तो मैं भी झड़ने वाला था।
उसका हो गया था.. पर एक अच्छे साथी की तरह मेरा साथ दे रही थी।
मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है.. तुम हट जाओ.. प्रेग्नेन्ट हो सकती हो।

फ़िर उसने चूत से लन्ड निकाल कर अपने मुँह में ले लिया।
हमें मजा आ गया.. पर मन अभी भरा नहीं था।
मैंने दिव्या को कहा- इस बार मैं तुम्हें बाँधता हूँ।
अब तड़पने की बारी उसकी थी..

वो बिस्तर में लेटी.. मेरी बहन क्या अप्सरा लग रही थी। मैंने उसे और ज्यादा तड़पाने और ज्यादा उत्तेजित करने के लिए उसकी गर्दन, पेट और चूत को चूमने लगा।
‘स्स्स्स्स्.. आह..उईई.. स्स्स्स..’ जैसी मस्त आवाजें सुनने को मिल रही थीं,अब वो लण्ड लेने के लिए तड़प रही थी।

अंततः मैंने उसकी चूत में अपना 6 इंची लौड़ा पेलना शुरू किया। धीरे-धीरे चुदाई जोर पकड़ने लगी। हमारे नंगे बदन एक-दूसरे में समा जाना चाहते थे.. मेरी बाँहों में फ़लक उठने लगे.. कुछ देर में हम दोनों झड़ गए।

मैंने दिव्या को खोल दिया और हमने एक लम्बी चुम्मी की। मैंने उसे गोद में बिठाकर बहुत देर बातें की।
वो बोली- मीत, आज तो तूने मुझे निचोड़ दिया।
उसके बाद हम दोनों एक-दूसरे की बाँहों में बाँहें डाल कर रजाई ओढ़ कर सो गए।

7 comments

  1. Story me dum hai

  2. Kya tum mast maal ho to mujhe bhi test karao

  3. If r u ready for sex pls cont me my no 834743xxxx