Home / घर में चुदाई का खेल / आया आंटी ने लंड चूस कर चूत चुदवाई (Aaya Aunty Ne Lund Chus Kar Chut Chudwai)

आया आंटी ने लंड चूस कर चूत चुदवाई (Aaya Aunty Ne Lund Chus Kar Chut Chudwai)

हाय.. मेरा नाम अमन दीप है.. मैं पंजाब का रहना वाला हूँ।
यह बात तब की जब मैं 12वीं क्लास में पढ़ता था। मॉम-डैड दोनों सरकारी नौकरी में होने के कारण मेरी देखभाल के लिए एक काम वाली आंटी रखी हुई थीं।

पहले तो सब ठीक चल रहा था.. एक दिन डैड ने मुझे पेप्सी का कैन लाकर दिया था। मैंने रात को पी लिया था.. खाली कैन रख दिया था।
सुबह जब हमारी काम वाली आंटी आईं तो उसने कहा- कैन को काट कर गिलास बना लो..
मैं और मेरा भाई हँसने लगा कि गिलास कैसे बनेगा।

तब मेरा भाई दूसरे कमरे में चला गया। आंटी चौकड़ी मार कर बैठ गई थीं.. उस वक्त तक डैड और मॉम ड्यूटी पर चले गए थे। छोटा भाई बाहर खेलने चला गया था.. तो मैं और आंटी ही घर पर थे।

आंटी कैन को कैंची से काट रही थीं.. तो कैन के टुकड़े आंटी के फुद्दी के पास गिरने लगे.. मैं टुकड़ों को उठाता-उठाता हाथ को उनकी फुद्दी के पास ले गया। मुझे बड़ा मजा आया.. फिर मैं जानबूझ कर ऐसा करने लगा।
आंटी ने भी मुझे नहीं रोका।
मैं मजा लेता गया.. और कैन कट कर गिलास बन गया था।

फिर ऐसे ही मैं हर रोज आंटी के पास जाता और किसी न किसी बहाने से उन्हें छूने की कोशिश करता।
जब आंटी बर्तन साफ करने के लिए सिंक के पास होतीं तो मैं अपना लुल्ला आंटी की गाण्ड में लगा कर आंटी से पानी का गिलास मांगता।
मैं ऐसे ही आंटी के आने पर रोज करता था और रोज आंटी के नाम की मुट्ठ मारता था।

फिर एक दिन वो वक्त भी आ गया.. जिसका मुझे इंतज़ार था।
टउस दिन आंटी को अपना कोई सूट ठीक करना था.. तो मॉम ने आंटी को मशीन निकाल दी। मैं आंटी से अपना पजामा ठीक करवा रहा था और आंटी के पास बैठा था।

उस दिन मेरे हाथ पर चोट भी लगी थी.. इसलिए मैं आंटी से अपने हाथ की मालिश करवा रहा था। मेरा लण्ड आंटी को छूने की कोशिश कर रहा था और एक हाथ आंटी की गाण्ड के नीचे दे रहा था। मुझे ऐसा करते काफी वक्त हो गया था। आंटी मेरे हाथ की मालिश भी कर रही थीं और मुझसे बातें भी कर रही थीं।

‘तेरे साथ स्कूल में लड़कियाँ भी हैं और तेरी कितनी फ्रेण्ड हैं.. तू उनके साथ क्या-क्या करता है.. किसी के वो किया या नहीं?’
मैं उनकी बातों से बहुत ज्यादा गरम हो गया था।
तभी आंटी ने आपनी गाण्ड उठा दी, मेरे लिए तो जैसे जन्नत का रास्ता खुल गया था, मैं आंटी की गाण्ड में उंगली देने लगा और आंटी अपनी गाण्ड दबवाने के साथ मेरा लौड़े को भी दबाने लगीं।

अब कहानी साफ़ हो गई थी तो मैं और आंटी उठ कर दूसरे कमरे में आ गए और एक-दूसरे को चूमने-चूसने लगे और गरम हो गए।
मेरा छोटा भाई जो टीवी देख रहा था.. उसको मैंने दुकान पर कुछ लेने के बहाने से भेज दिया।

अब मैं और आंटी एक-दूसरे को चूसने लगे। मैंने आंटी के सारे कपड़े उतार दिए आंटी ने मेरे कपड़े उतार दिए। मैं आंटी के मम्मे चूसने लगा और आंटी मेरे लुल्ले को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं।
कुछ ही देर में मेरा माल उनके मुँह में ही निकल गया और आंटी ने मेरा सारा माल चाट कर साफ कर दिया।

फिर आंटी ने दुबारा मेरा लुल्ले को मुँह में लेकर खड़ा कर दिया। मेरा उन पर हाथ फिराने और चूसने से आंटी भी गरम हो गईं और बोलीं- अब रहा नहीं जा रहा.. डाल दे अन्दर.. फाड़ दे मेरी फुद्दी..
मैंने भी टाइम ख़राब न करते हुए एक जोरदार झटका मारा और मेरा आधा लुल्ला आंटी की फुद्दी में घुस गया।

आंटी चिल्लाने लगीं.. पर मुझ पर तो जैसे फुद्दी मारने का भूत सवार था। मैं लगातार चुदाई में लगा रहा और अब तो आंटी भी नीचे से गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थीं।
करीब दस मिनट बाद मेरा माल छूटने को था.. इस बीच आंटी का एक बार हो गया था। मैंने आंटी से पूछा- कहाँ निकालूँ?
उन्होंने कहा- अन्दर ही छोड़ दे।

एक बार चुदाई के बाद हम दोनों लेट गए..
फिर यह सिलसिला चल निकला, मैंने कई बार आंटी को चोदा। फिर उस के बाद आंटी सिरसा चली गईं